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Sunday, April 26, 2020

Karva Chauth: करवा चौथ; کروا چوتھ ; Afsancha;लघु कहानी;افسانچہ

Karva Chauth: करवा चौथ; کروا چوتھ 
 Afsancha;लघु कहानी;افسانچہ 

करवा चौथ 
सब औरतें चन्द्रमा की प्रतीक्षा कर रही थीं। उसने भी दिन भर व्रत रखा था और अपने स्वामी का इंतज़ार कर रही थी। 
वह हमारे पड़ोस में रहती थी। ऐसा कोई दिन व्यतीत नहीं होता था जब वह अपने पति के साथ लड़ती झगड़ती ना थी और लड़ते लड़ते दुर्वचन ना  कहती थी। कभी कभी वह इस सीमा तक चली जाती की भगवान् से अपने पति को उठाने की प्रार्थना करती। उसका पति शारीरिक रूप से कमज़ोर था, इसलिए सब कुछ सहन कर लेता जब तक वह स्वयं ही चुप ना हो जाती। 
अंततः चन्द्रमा ने अपनी शक्ल दिखाई और मेरी अर्धांगनी ने मेरा चेहरा छलनी में से देखकर पूजा शरू कर दी। अकस्मात् हम दोनों की नज़रें अपने पड़ोसियों पर पड़ीं जो यही कार्यवाही दूसरी छत पर कर रहे थे। उन्हें देख कर मेरी पत्नी से रहा ना गया। कहने लगी, "क्या आप अनुमान लगा सकते  हैं?"
मैंने पुछा, "किस बारे में?"
उसने कहा, "हमारी पड़ोसन ने आज पति के मरने की दुआ मांगी होगी या जीने की?"
मुझे कोई उत्तर सूझ नहीं रहा था इसलिए खामोश रहना ही उचित समझा।    

Monday, January 9, 2012

Thais, ٹھیس : (Urdu/Hindi); Afsancha; افسانچہ ; Ministory

Thais, ٹھیس : (Urdu/Hindi)
 Afsancha; افسانچہ ; Ministory

ठेस 

ज्यूँ ही मुझे पहली बार दिल्ली में नौकरी मिली मैंने मोती नगर में एक कमरा किराये पर ले लिया। मकान मालकिन चालीस पैंतालीस साल की एक खूबसूरत औरत थी जो उस उम्र में भी बन संवर कर रहती थी। मैं हमेशा  उसको माँ की तरह इज्ज़त करता था यहाँ तक कि उस घर को अपना घर समझने लगा था। चूंकि वह पाकिस्तान से पलायन करके आई थी इसलिए कभी कभार अपने अतीत को कुरेदती रहती और दुखद तथा उदास करने वाली कहानियां सुनाती थी। 
एक रोज़ वह बेड पर लेटी अपना एल्बम देख रही थी कि मैं कमरे में दाखिल हुआ और उसके सामने कुर्सी पर बैठ गया। उसके चेहरे की उद्दीप्ति से लग रहा था कि वह अपनी जवानी की कोई हसीन घटना याद कर रही थी। मुझे एल्बम थमाते हुए वह बोली, "अरुण देखो तो कितनी सुंदर थी मैं जवानी के दिनों में।"
"हाँ आंटी आप तो सुचमुच बहुत खूबसूरत थीं" मैंने हाँ में हाँ मिलाई।" 
"बेटे जब हम पाकिस्तान से पलायन करके आये थे तो मेरे भाई हरीश,जो फिल्म प्रोडूसर था,ने मुझे मुंबई बुलाया और अपनी नई फिल्म 'हीराभाई'  के लिए हेरोइन का रोल ऑफर किया था।"
" बड़ी अच्छी ऑफर थी, फिर आपने क्यों ठुकराई।"
"इसी बात पर तो अबतक पछता रही हूँ। गई होती तो ऐश की ज़िन्दगी बसर कर लेती। जुबैदा एक रात के बीस हज़ार रुपए चार्ज करती है और बीना कुमारी की तो बात ही नहीं वह तो रात भर के चालीस हज़ार लेती है। मेरी   रेट तो कम से कम पचास हज़ार होती।"
मैं विस्मित होकर उसको बहुत देर तक देखता रहा। मुझे अपने कानों पर यकीन ही नहीं हो रहा था। 




 

Rishton Ke Maheen Reshe: Ashma Kaul – Deepak Budki

          Rishton Ke Maheen Reshe: Ashma Kaul                            – Deepak Budki A collection of Hindi short stories titled ‘Rishton ...