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Monday, April 2, 2012

Ever Ready, ایور ریڈی : (Urdu/Hindi); Afsancha; Laghu Katha; افسانچہ

Ever Ready, ایور ریڈی :
(Urdu/Hindi)
Afsanacha;Laghu Katha; افسانچہ  


                                                                    एवररेडी 

मैं एवररेडी बैट्री की बात नहीं कर रहा हूँ बल्कि अपने एक दोस्त की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिस को हम एवररेडी के नाम से बुलाते थे.
मोहले में जब किसी बुज़ुर्ग को दूध, दही, सिगरेट , या तम्बाको की आवश्यकता पड़ती थी वह बिना किसी झिझक के उसे बुलाते थे. गर्मी हो या सर्दी, बारिश हो या बर्फ़बारी , उस ने कभी किसी का दिल नहीं दुखाया. मैं एवररेडी के इस व्यव्हार से आश्चर्यचकित होजाता. आखिर एक बार पूछ ही बैठा ," यार तुम ने हमारी छवि ही ख़राब कर दी है.जब भी कोई तुम्हें काम के लिए बुलाता है तुम झट से हाज़िर हो जाते हो.आखिर बात क्या है "
"यार तुम से क्या छिपाना . दूध हो या दही, मैं हमेश शाबान गुरू से खरीद लेता हूँ. थोड़ी दूर तो जाना पड़ता है पर वह एक पाऊ की कीमत बाज़ार से दो पैसे कम लगाता है और वह दो पैसे मैं अपने लिए रख लेता हूँ. तम्बाको सिगरेट लाने में भी कुछ ऐसा ही फायदा समझ लो.
मैं ने इसे ज्यादा जानकारी लेना उचित नहीं समझा.अलबता एक दिन उसके पिताजी ने मुझे रास्ते  में रोक लिया और अजीब सी विवशता प्रकट की,"रोशन तुम अपने दोस्त को क्यूँ नहीं समझाते . दो दिन पहले मैं ने उसको महीने का राशन लाने के लिए पचास रुपये दिए थे. कुछ दैर के बाद वह आया और कहने लगा की रुपये मेरी  जेब से न जाने कहाँ गिर गए. फिर मुझे पता चला की वह सुख राम पंसारी से सिगरेट उधार लिया करता था और वह सारा रूपया उसी पंसारी को देकर आगया. मैं उस को कुछ कह नहीं पाता क्यूंकि वह मेरी पहली बीवी का बेटा है. तुम तो उस के करीबी दोस्त हो , शायद तुम्हारी बात मान जाये. बेटे मैं एक गरीब मास्टर हूँ, तीन लड़कियां सर पर सवार हैं. फिर भला बताओ ऐसे खर्चे मैं कैसे बर्दाश्त कर सकता हूँ."
अंकल का दिल रखने के लिए मैंने उन्हें झूठी तस्सली दी परन्तु इतना मालूम था की एवररेडी कब किसी की सुनता है.

Wednesday, March 14, 2012

Court Martial, کورٹ مارشل : (Urdu/Hindi); Afsancha; Laghu Kahani; افسانچہ

Court Martial, کورٹ مارشل :
(Urdu/Hindi)
Afsancha; Laghu Kahani; افسانچہ 

                      कोर्ट मार्शल

यह एक सची कहानी है. सम्मरी कोर्ट मार्शल के तीन जजों में एक मैं भी था. एक फौजी लेडी डॉक्टर ने हमारे रूबरू खड़े सिख सिपाही के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी कि जब वह नहा रही थी तो एक सिख सिपाही ने  बाथ रूम की खिड़की से अन्दर झाँका था और वह विश्वास के साथ कह सकती है कि यही वह सिपाही है.

मैं सोच में पड़ गया कि उस की नज़र जब खिड़की की ओर उठ गयी होगी तो वह ज़रूर भोख्लाई होगी ओर स्वाभाविक प्रवृति के कारण उसने पहले अपने नंगे शरीर को ढांपने की कोशिश की होगी. उस के कहने के अनुसार सिपाही देखते ही भाग गया था . डॉक्टर ने तो क्षण भर के लिए ही सिख सिपाही का चेहरा देखा होगा जो अधिकतर दाढ़ी से ढाका छुपा रहता है फिर उसने इतनी ही देर में उस के चेहरे को कैसे याद रखा होगा? 

परन्तु यहाँ समस्या पहचान की नहीं थी बल्कि फौजी अफसर और वह भी लेडी अफसर की प्रतिष्ठा की थी . सिख सिपाही चाहे कोई भी हो किसी न किसी को तो सज़ा देनी ही थी. इसलिए तीनों जजों ने एकमत से सिपाही को पंद्रह दिन कैद की सज़ा सुनाई.

मेरी अंतरात्मा आज तक मुझे कचौकती रहती है जबकि इन्साफ फटी पुरानी फाइलों में कब का दम तोड़ चुका है. 


                           

















 
                          

Friday, March 2, 2012

Guarantee, گارنٹی : (Urdu/Hindi); Afsancha; Laghu Kahani; افسانچہ

Guarantee, گارنٹی :
(Urdu/Hindi)
Afsancha; Laghu Kahani; افسانچہ 

गारंटी

कल रात जब मैं क्लब से लौट रहा था तो बिरला चौक की रेड लाइट पर अपनी कार कुछ देर के लिए रोकनी पड़ी। अकस्मात फटे पुराने, मैले कुचैले कपडे पहने हुए एक चौदह पंद्रह वर्ष का लड़का  दौड़ कर करीब आया और दोनों हाथ फैलाने लगा, "साहब, बहुत भूख लगी है. कुछ पैसा देदो. भगवान आप का भला करेगा।"
साथ वाली सीट पर बैठा मेरा दोस्त झिल्लाया और लड़के से कहने लगा, "कोई काम क्यूँ नहीं करते। तुम लोगों को भीख मांगने की आदत पड गयी है।"
"साहब काम मिलता ही कहाँ है। आप ही मुझे अपने घर में नौकर रख लो. मैं हर काम करने के लिए तैयार हूँ।" उसके चेहरे पर आत्मविश्वास झलक रहा था। 
मेरा दोस्त खिसयाना हो कर रह गया। 
मैं अपने दोस्त की तरफ मुढ़ा और व्यंगात्मक लहजे में कहने लगा। "हाँ ठीक ही तो कहता है। तुम तो नौकर ढूंढ ही रहे हो। रख लो इसी को नौकर।" 
"ना जान ना पहचान। यार कैसे रखूँ इसको नौकर। क्या गारंटी है इसकी? कौन है? कहाँ का है? किसे मालूम?"
"यही तो प्रॉब्लम है यार। इस देश में लाखों लोग ऐसे हैं जिन की कोई गारंटी नहीं दे सकता। फिर वोह भीख न मांगें तो क्या करें?"




                                                                 
 

















         

 








Monday, January 30, 2012

Pani to Pila do Yaar , پانی تو پلا دے یار : (Urdu/Hindi); Afsancha; Laghu Kahani; افسانچہ

Pani to Pila do Yaar ، پانی تو پلا دے یار 
(Urdu/Hindi)
 Afsancha; Laghu Kahani; افسانچہ   


पानी तो पिला दो यार 

कोई चालीस साल पुरानी बात है। तब ना तो कश्मीर में आतंकवाद था और ना ही बंदूक का चलन किन्तु किसी ना किसी बहाने प्रदर्शन होते रहते थे।  कभी अमेरिका के खिलाफ तो कभी इस्राईल के खिलाफ, कभी भुट्टो के हक़ में और कभी उसको फँसी देने वाले ज़ियाउलहक़ के समर्थन में, कभी शेख़ अब्दुल्लाह की नज़रबंदी पर और कभी शिया संप्रदाय के मुहर्रम जलूस निकालने पर।   

उस समय की सरकार जल्दी से सी आर पी ऍफ़  को तैनात करके ला एंड आर्डर बहाल कर लेती थी। सामान्यतया लाठियों से काम चल जाता था फिर भी कभी-कभी आंसों लाने वाली गैस इस्तेमाल होती थी। 

एक दिन सी आर पी ऍफ़ का एक जवान भटकता हुआ एक अंधी गली में जा फंसा। बहुत कोशिश के बावजूद उसे रास्ता नहीं सूझ रहा था।  प्रदर्शन करने वालों की एक टोली जो इस तरफ निकली उसे देख कर क्रोधित  हो गयी।  लगे उस को थपड और घूंसे मारने। फिर जूते, चप्पल और कांगडियां, जो हाथ में आया उसपर फेंक दिये। जवान बे होश हो गया। 

मारने वालों में से एक आदमी की नज़र उसपर पडी और वह चिल्लाया, "अरे रुक जाओ, रुक जाओ, यह आदमी मर जाए गा। कोई इसे पानी तो पिला दो यार। फिर वह स्वयं दौड़ कर एक बोतल में पानी ले आया और सिपाही को पिलाने लगा जब तक वह होश में नहीं आया। फिर उसको सहारा देकर खड़ा किया गया और दो तीन आदमी उसके साथ जा कर उसे सड़क पर छोड़ आये। 

Sunday, January 22, 2012

Chamatkar, چمتکار : (Urdu/Hindi); Afsancha; Laghu Kahani; افسانچہ

Chamatkar ، چمتکار : (Urdu/Hindi)
Afsancha; Laghu Kahani; افسانچہ 


                        


                                                                  चमत्कार

"पापा आज एक चमत्कार हुआ।" एक नास्तिक बेटे ने अपने आस्तिक पिता पर चोट करने के उद्देश्य से कहा। "एक अमरीकी वैज्ञानिक ने टेस्ट-ट्यूब  में बच्चा पैदा कर लिया।"

"वाह रे भगवान, तेरे जलवे भी हज़ार। कब क्या रूप धारण करे, किसे मालूम।" फिर वह अपने बेटे की ओर संभोदित हुआ। "बेटे यह सब भगवान की माया है, तुम नहीं समझ पाओ गे। "


Monday, January 9, 2012

Thais, ٹھیس : (Urdu/Hindi); Afsancha; افسانچہ ; Ministory

Thais, ٹھیس : (Urdu/Hindi)
 Afsancha; افسانچہ ; Ministory

ठेस 

ज्यूँ ही मुझे पहली बार दिल्ली में नौकरी मिली मैंने मोती नगर में एक कमरा किराये पर ले लिया। मकान मालकिन चालीस पैंतालीस साल की एक खूबसूरत औरत थी जो उस उम्र में भी बन संवर कर रहती थी। मैं हमेशा  उसको माँ की तरह इज्ज़त करता था यहाँ तक कि उस घर को अपना घर समझने लगा था। चूंकि वह पाकिस्तान से पलायन करके आई थी इसलिए कभी कभार अपने अतीत को कुरेदती रहती और दुखद तथा उदास करने वाली कहानियां सुनाती थी। 
एक रोज़ वह बेड पर लेटी अपना एल्बम देख रही थी कि मैं कमरे में दाखिल हुआ और उसके सामने कुर्सी पर बैठ गया। उसके चेहरे की उद्दीप्ति से लग रहा था कि वह अपनी जवानी की कोई हसीन घटना याद कर रही थी। मुझे एल्बम थमाते हुए वह बोली, "अरुण देखो तो कितनी सुंदर थी मैं जवानी के दिनों में।"
"हाँ आंटी आप तो सुचमुच बहुत खूबसूरत थीं" मैंने हाँ में हाँ मिलाई।" 
"बेटे जब हम पाकिस्तान से पलायन करके आये थे तो मेरे भाई हरीश,जो फिल्म प्रोडूसर था,ने मुझे मुंबई बुलाया और अपनी नई फिल्म 'हीराभाई'  के लिए हेरोइन का रोल ऑफर किया था।"
" बड़ी अच्छी ऑफर थी, फिर आपने क्यों ठुकराई।"
"इसी बात पर तो अबतक पछता रही हूँ। गई होती तो ऐश की ज़िन्दगी बसर कर लेती। जुबैदा एक रात के बीस हज़ार रुपए चार्ज करती है और बीना कुमारी की तो बात ही नहीं वह तो रात भर के चालीस हज़ार लेती है। मेरी   रेट तो कम से कम पचास हज़ार होती।"
मैं विस्मित होकर उसको बहुत देर तक देखता रहा। मुझे अपने कानों पर यकीन ही नहीं हो रहा था। 




 

Rishton Ke Maheen Reshe: Ashma Kaul – Deepak Budki

          Rishton Ke Maheen Reshe: Ashma Kaul                            – Deepak Budki A collection of Hindi short stories titled ‘Rishton ...