Wednesday, February 24, 2021

Ghair Rasmi Tarbiyat;अनौपचारिक प्रशिक्षण;غیر رسمی تربیت;Ministory;लघु कहानी ;افسانچہ

Ghair Rasmi Tarbiyat;अनौपचारिक प्रशिक्षण
غیر رسمی تربیت 
Ministory;लघु कहानी ;افسانچہ 

अनौपचारिक प्रशिक्षण 

पत्नी और पांच बच्चों को बेसहारा छोड़कर वो सड़क दुर्घटना में युवावस्था में ही मर गया। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर ने उसके बड़े बेटे को, जो व्यस्क था ना मेट्रिक पास, उसक्वे स्थान पर रिआयती तौर पर क्लर्क नियुक्त किया। उसकी दुर्दशा पर तरस खाकर सेक्शन सुपरवाइजर ने भी बड़े परिश्रम, अनुकंपा और वात्सल्य से उसको कई वर्ष तक अनौपचारिक प्रशिक्षण दिया ताकि वह अच्छा क्लर्क बन सके। इसी दौरान वह मैनेजिंग डायरेक्टर की नज़रों में समा गया। लड़का मेहनती था और उसकी सब से बड़ी खूबी यह थी कि दुनिया इधर की उधर हो जाए मगर वह अपने मुंह से कोई गोपनीय बात प्रकट नहीं करता था। फलस्वरूप उसको ऐसी ज़िम्मेदारियां सौंपी गईं जिन में गोपनीयता की आवश्यकता थी। लड़के ने भी नमक का हक़ बड़ी ईमानदारी से अदा किया। देखते ही देखते कई प्रमोशन मिले और वह अफसर बन गया। 
एक दिन मैंने सुपरवाइजर के कमरे में प्रवेश किया। वह बहुत ही उदास लग रहा था। कारण पुछा तो कहने लगा, "यहाँ तो अब दम घुटने लगा है। कल का यह अनपढ़ छोकरा जिसको हाथ पकड़ कर मैंने काम सिखाया आज मेरा ही अफसर बन चुका है और मुझ पर हुकुम चलाता है।"
उसके आंतरिक द्वंद्व का अंदाज़ा लगाना कठिन न था। मैंने मुस्कराते हुए प्रश्न पूछा, "एक कश्मीरी कहावत है, 'अथि हावुन गव अथि ख्यावुन' अर्थात हाथ दिखाना यानी हुनर सिखाना अपने हाथ कटवाने के बराबर होता है।" क्या उसको हाथ पकड़ कर प्रशिक्षण देना आपके आधिकारिक कर्तव्यों में शामिल था?"
वह मुझे टुकुर-टुकुर देखने लगा। "नहीं भाई, मैंने सोचा कि उसको कुछ भी नहीं आता है भविष्य में संकट में पड़ जाएगा।"
"इसलिए आप ने काम के सभी गुर सिखा दिये मतलब अपने पांव पर स्वयं  ही कुल्हाड़ी मार दी। है ना....? जबकि यह काम आपका नहीं था। अब भुगतो इसका फल। फिर परेशान किस बात पर हो रहे हो?"               


 

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