Thursday, February 25, 2021

Jaali Sazi;जाली साज़ी;جالی سازی ; Ministory;लघु कहानी;افسانچہ

Jaali Sazi;जाली साज़ी;جالی سازی 
Ministory;लघु कहानी;افسانچہ 

जाली साज़ी 

बरैली में हमारे पड़ोस में एक रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर रहता था। उसकी दिल्ली तमन्ना थी कि उसके बच्चे एम् बी बी एस करके डॉक्टर बन जाएं। जवानी में ही उसकी मृत्यु हो गयी मगर मरने से पहले उसने अपनी ग्रहस्ती पत्नी को अपनी अभिलाषा से अवगत किया। आज्ञाकारी पत्नी ने वंशागत संपत्ति से तीनों बच्चों को डाक्टरी शिक्षा दिलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 
बड़ी लड़की डॉक्टर बनकर शाहजहांपुर के गवर्नमेंट हॉस्पिटल में नियुक्त हुई। हर दिन आते-जाते रेल गाडी में धक्के खाती रहती। दूसरी लड़की ने कमाने का अनोखा ढंग अपना लिया। घर में ही क्लिनिक खोला और हर महीने दो-तीन अवैध गर्भपात निपटा लेती। अपनी बहन से कई गुना अधिक कमाई करके वह कभी-कभी उसको चिढ़ाती भी थी।  
उधर भाई लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में शिक्षा प्राप्त कर रहा था लेकिन वीक-एंड्स पर हर शनिवार को घर आ जाता। घर में उसने स्टील तार की जाली बनाने के लूम लगाए थे और शिक्षा से ज़्यादा बिज़नेस में दिलचस्पी लेता था। मुझे यूँ महसूस हो रहा था कि तीनों में से किसी को डॉक्टरी के साथ रुचि नहीं है। उन्होंने केवल मां का दिल रखने के लिए मेडिकल की डिग्री ले ली थी। 
उनको देख कर मुझे वह दिन याद आता था जब योग्यता के बावजूद सिफारिश और पूंजी ना होने के कारण मेडिकल इंटेरन्स टेस्ट में मेरी उपेक्षा की गई थी। पीड़ा ज़्यादा इस बात की होती थी कि जो गरीब विद्यार्थी सुच-मुच इस व्यवसाय से अत्यन्त प्रेम करते हैं उन्हें कॉलेज में सीटें नहीं मिलतीं और जिन्हें दौलत की वजह से ज़ोर-ज़बरदस्ती शिक्षा दिलाई जाती है वह उस की क़द्र नहीं करते। 

 

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