Monday, March 8, 2021

Taqleeb-e-Mahiyat; कायान्तरण; تقلیب ماہیت ;Ministory;लघु कहानी;افسانچہ

Taqleeb-e-Mahiyat; कायान्तरण; تقلیب ماہیت 
Ministory;लघु कहानी;افسانچہ 

कायान्तरण 

एक रोज़ एक जाट शिक्षक ने अपने सहकर्मी से सवाल किया, "यार मुझे हैरत होती है कि तुम्हारे हाथ में ना कमची होती है और ना छड़ी फिर भी विद्यार्थी क़ाबू में रहते हैं।  इसके विपरीत मेरे हाथ में हमेशा सोंटा रहता है, इसके बावजूद विद्यार्थी हुल्लड़ मचाते हैं। डंडे के बग़ैर अनुशासन रखना मुश्किल होता है। मुझे हैरानी इस बात की है कि तुमसे यह लड़के कैसे सँभलते हैं?"
सहकर्मी गाँधी जी के असूलों पर चलता था। उसने उत्तर दिया, "नहीं ऐसी बात नहीं है। बच्चों को प्यार से समझाना पड़ता है। उनको जितना प्यार दोगे उतनी ही वह तुम्हारी इज़्ज़त करेंगे। कभी आज़मा के तो देखलो।"
शिक्षक ने दो चार दिन हाथ में सोंटा उठाने से परिवर्जन क्या मगर विद्यार्थी थे कि रोज़बरोज़ सिर पर चढ़े जारहे थे। बहुत कोशिश के बावजूद वह विद्यार्थियों को कन्ट्रोल करने में असफल रहा यहाँ तक कि बात प्रिंसिपल तक पहुँच गयी और उसने शिक्षक को फटकार लगायी। परिणाम स्वरुप उसको एक बार फिर हाथ में सोंटा उठाना पड़ा। 
अगले दिन वह अपने सहकर्मी से उलाहना करने के लिए स्टाफ रूम में चला गया। "भाई तुम ने तो मेरी नौकरी ख़राब कर देनी थी। मैंने तुम्हारी बातों पर अमल क्या किया विद्यार्थी तो बेलगाम होगए और क्लास में धमाचौकड़ी मचाते रहे। मैं बार-बार उनको खामोश रहने की अपील करता रहा मगर वह माने ही नहीं।  प्रिंसिपल साहब इस बात पर बहुत नाराज़ होगए और मुझे मेमो भी दे दिया। अब तो मुझे पूरा यक़ीन होगया है की डंडे के बग़ैर काम नहीं चल सकता।"
"भाई तुम ने तो बस दो चार दिन पहले अपने हाथ में सोंटा उठाना बंद कर दिया मगर विद्यार्थियों को कैसे मालूम होगा कि उनके शिक्षक का व्यवहार बदल गया है। तुम्हारे चेहरे पर तो कहीं लिखा नहीं है। वास्तव में सोंटा तुम्हारे व्यक्तित्व का अटूट अंग बन चूका है। विद्यार्थियों ने जबसे स्कूल में प्रवेश किया है तुम्हें सोंटे के साथ ही पाया है। नया तरीक़ा आज़माने के लिए पहले तुम्हें स्वयं इस तरीके पर पूरा भरोसा करना पडेगा, फिर अपने व्यक्तित्व को इस सांचे में ढालना  पड़ेगा तब ही विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया सकारात्मक हो गी वर्ना नहीं।" सहकर्मी ने उत्तर दिया।  



 

2 comments:

  1. شاید ایسی ہی وجوہات سے یہ محاورہ وجود میں آیا ہو گا
    ڈنڈہ پیر مشٹنڈوں کا

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