Saturday, April 11, 2020

T R P: टी आर पी: ٹی آر پی ; Afsancha;लघु कहानी; افسانچہ

T R P: टी आर पी: ٹی آر پی 
 Afsancha;लघु कहानी; افسانچہ 

टी आर पी 

आजकल समाचार पत्र कौन पढ़ता है। एक रोज़ पहले वही खबरें दूरदर्शन पर प्रसारित होती हैं और फिर उन पर गर्मागर्म वाद-विवाद होता है। कहीं पर भाग लेनेवाले गला फाड़-फाड़ कर अपना दृष्टिकोण पेश करते हैं और कहीं पर शांति से अपनी बात रखते हैं। कोई टी वी एंकर स्वयं बहुत कम बोलता है और कोई किसी और को बोलने नहीं देता। उसे दूसरों की उपस्थिति का एहसास ही नहीं होता। सीमा पर किस जवान का सिर कट गया, कश्मीर में कहाँ पत्थरबाज़ी हुई, गौ रक्षकों ने किस गाय हांकने वाले को सरेबाज़ार पीट कर मार दिया या फिर चुनाव बूथ पर किस को गोली मार दी गई, प्रत्येक चैनल पर उत्तेजक समाचार .. ...! किसानों के घरों में चूला जला  या नहीं उसकी किसी को चिंता नहीं परन्तु बॉलीवुड हीरोइन के विवाह में कैसा हंगामा हुआ इसकी खबर दिन भर चलती है। यह सब टी आर पी का करिश्मा है। 
शिक्षित सदानंद अपने खेत में खड़ा पापड़ जैसी ज़मीन पर नज़र डाल कर सोचता है कि १३० करोड़ लोगों का यह देश, करोड़ों खेत, लाखों गांवों, लाखों बस्तियां, हज़ारों नगर  और हज़ारों औद्योगिक केंद्र......! मगर समाचारों के सन्दर्भ में सारा देश बाँझ मालूम होता है जैसे मेरे सूखे खेत में कहीं कोई हरा पत्ता नज़र नहीं आता।      



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