Wednesday, 1 February 2012

Khud Kushi- #MiniStory #UrduAfsana #HindiLaghuKatha

Khud Kushi
 #MiniStory #UrduAfsana #HindiLaghuKatha
                      
 


                                 आत्महत्या  

घरेलु परेशानियों से तंग आकर पिछले रविवार प्रातः सात बजे के करीब मैं आत्म हत्या करने के लिए घर से निकल पड़ा और यमुना नदी के किनारे खड़ा हो गया. अचानक मेरी  नज़र एक खूबसूरत औरत पर पड़ी जो कुछ ऐसे ही इरादे से वहां आई थी. मुझ से रहा न गया और दौड़ कर उस के पास पहुँच गया कि कहीं वह इस बीच छलांग न लगाये.  

"महोदया जी, आत्म हत्या करना बहुत बडा पाप है. आप को ऐसा नहीं करना चाहिए." मेरे मुंह से न जाने क्यूँ यह शब्द उबल पड़े.

" मेरे पास और भी तो कोई चारा नहीं है . मैं ज़िन्दगी से तंग आ चुकी हूँ."

"ज़िन्दगी से लड़ने में जो मज़ा है वह भागने में नहीं. आप पढ़ी लिखी मालूम होती हैं. अपने पाँव पर खड़े होकर मुसीबतों का सामना कर सकती हैं. फिर ऐसी हरकत आप को शोभा नहीं देती है."

मेरी बातों का उस पर इतना असर हुआ कि वह पलट कर वापस चली गयी. तब तक मैं भी भूल चूका था कि मैं किस काम से यहाँ आया था. जल्दी जल्दी घर पहुंचा और सीधे अपने बेड रूम में चला गया. मेरी बीवी हाथ  में मेरा  खुदकुशी का नोट लिए बिस्तर ठीक कर रही थी. 

मुझे देखते ही कहने लगी , " क्यूँ लौट आये. तुम्हारी यह गीदड़  भुभकियाँ तो मैं कई बार सुन चुकी हूँ. मुझे यकीन था कि तुम उलटे पैर लौट आओ गे."