Deepak Budki - works

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Monday, 9 January 2012

Thais- #Afsancha #Ministory #UrduMniKahani #HindiLaghuKatha

Thais
 #Afsancha #Ministory #UrduMniKahani #HindiLaghuKatha




ठेस 
ज्यूँ ही मुझे पहली बार दिल्ली में नौकरी मिली मैंने मोती नगर में एक कमरा किराये पर ले लिया. मकान  मालकिन चालीस पैंतालीस साल की एक खूबसूरत औरत थी जो उस  उम्र में भी बन संवर कर रहती थी.मैं हमेशा  उस को माँ की तरह इज्ज़त करता था यहाँ तक कि उस घर को अपना घर समझने लगा था. चूंकि वह पाकिस्तान से पलायन  करके आई थी इसलिए कभी कभार अपने अतीत को कुरेदती और दुखद तथा उदास करने वाली कहानियां सुनाती रहती थी.
एक रोज़ वह बेड पर लेटी अपना एल्बम देख रही थी कि मैं कमरे में दाखिल हुआ और उस के सामने कुर्सी पर बैठ  गया. उस के चेहरे की तमतमाहट से लग रहा था कि वह अपनी जवानी का कोई हसीन हादिसा याद कर रही थी. मुझे एल्बम थमाते हुए वह बोली," अरुण देखो तो कितनी हसीन थी मैं जवानी के दिनों में."
"हाँ आंटी आप तो सुच मुच बहुत खूबसूरत थीं" मैं ने हाँ में हाँ मिलायी.
"बेटे जब हम पाकिस्तान से पलायन करके आये तो मेरे भाई हरीश,जो फिल्म प्रोडूसर था,ने मुझे मुंबई बुलाया और अपनी नयी फिल्म 'हीराभाई'  के लिए हेरोइन का रोल ऑफर किया."
" बड़ी अच्छी ऑफर थी , फिर आप ने क्यूँ ठुकराई ."
"इसी बात पर तो अब तक पछता रही हूँ . गयी होती तो ऐश की ज़िन्दगी बसर कर लेती. जुबैदा एक रात के बीस हज़ार रुपए चार्ज करती है और बीना कुमारी की तो बात ही नहीं वह तो रात भर के चालीस हज़ार लेती है. मेरा  रेट तो कम से कम पचास हज़ार होता ."
मैं विस्मित होकर उस को बहुत देर तक देखता रहा. मुझे अपने कानों पर यकीन ही नहीं हो रहा था.