Deepak Budki - works

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Wednesday, 11 January 2012

Lakshmi Ka Swagat - #Afsancha #MiniStory #UrduKahani #HindiLaghuKatha

Lakshmi Ka Swagat 
 #Afsancha #MiniStory #UrduKahani #HindiLaghuKatha

 
  


                  
                            लक्ष्मी का स्वागत 

"लक्ष्मी आई है बेटा लक्ष्मी. हमारे घर लक्ष्मी आई है " बहु के घर में क़दम रखते ही विद्यासागर के पिता जी ख़ुशी से झूम उठे.

बहु उम्मीद से ज्यादा दहेज लेकर आई थी फिर भी विद्यासागर को शांति नहीं मिल रही थी. वह सरस्वती की तलाश में मारा मारा फिर रहा था. उसे समझ नहीं आ रहा था कि हर बहु लक्ष्मी का रूप ही क्यूँ  धारण करती है , सरस्वती का क्यूँ नहीं? 

सरस्वती की तलाश में विद्यासागर दर दर भटकता रहा. अंतत: उस ने घर से बहुत दूर एक आश्रम में शरण ले लिया .